प्रशिद्ध बिर्टिश वेज्ञानिक माइकल फैराडे ने 18वीं सदी के बाद विधुत और Capacitor की प्रकर्ति का निर्धारण किया तथा उसके बाद ही कैपेसिटेन्स की इकाई को फैराडे नाम दिया गया !
आजकल कनडेंसर को Capacitor कहा जाता है ! इसका कार्य विधुत उर्जा को इकट्टा करना तथा उसे पुन : प्रदान कर देना अथार्थ “विधुत को चार्ज और डिस्चार्ज करना है”
2. दो विभागों को जोड़ना (Coupling).
3. अवांछित फ्रीक्वेंसी को ग्राउंड करना (By Pass)
4. किसी विभाग कोवांछित सिग्नल देना (Feed Through)
5. तरंग का आकार उलटना
6. डिले टाइम उत्त्पन्न करना
7. सिगनल का तुलनात्मक अध्यन करना
8. दो विभागों में अलगाव पैदा करना
वास्तव में कैपेसिटर एक टंकी की तरह कार्य करता है. जिस प्रकार टंकी में पानी को इकट्टा किया जा सकता है, ठीक उसी तरह Capacitor में विधुत को इकट्टा किया जाता है ! इसे Capacitor को चार्ज होना कहते है.
आजकल कनडेंसर को Capacitor कहा जाता है ! इसका कार्य विधुत उर्जा को इकट्टा करना तथा उसे पुन : प्रदान कर देना अथार्थ “विधुत को चार्ज और डिस्चार्ज करना है”
Work of Capacitor ! कैपेसिटर के कार्य.
1. D.C सप्लाई को रोकना और A.C को पास करना.
2. दो विभागों को जोड़ना (Coupling).
3. अवांछित फ्रीक्वेंसी को ग्राउंड करना (By Pass)
4. किसी विभाग कोवांछित सिग्नल देना (Feed Through)
5. तरंग का आकार उलटना
6. डिले टाइम उत्त्पन्न करना
7. सिगनल का तुलनात्मक अध्यन करना
8. दो विभागों में अलगाव पैदा करना
वास्तव में कैपेसिटर एक टंकी की तरह कार्य करता है. जिस प्रकार टंकी में पानी को इकट्टा किया जा सकता है, ठीक उसी तरह Capacitor में विधुत को इकट्टा किया जाता है ! इसे Capacitor को चार्ज होना कहते है.

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